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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर एक छोटी सी रचना
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जय हो गणतंत्र
धन्य हो लोकतंत्र
खड्डे में जनता,
महंगाई से मरता
सिलेंडर में दबता
तेल में जलता
घुटता जनतंत्र
अद्भुत लोकतंत्र
जय हो गणतंत्र
छद्म पंथनिरपेक्षता ढोता
संस्कृति को रोता
आतंकवाद से मरता
अधिकारों को लड़ता
अनगिनत फूहड़ता
चूल्हे में जनतंत्र
जय ही गणतंत्र
उम्मीदों पर जीता
ज़ख्मो को सीता
बचपन को बचाता
सुनहरे ख्वाब देखता
कब आएगा गणतंत्र
जब धन्य होगा लोकतंत्र
और कहेंगे हम
जय हो गणतंत्र
जय हो लोकतंत्र
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रवि कुमार “रवि”

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