Posts Tagged ‘poems on Veer Ras Subject’

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जो फिक्र राष्ट्र की करते है
वो नहीं किसी से डरते है
हंस कर सूली चढ़ते है
शत्रु भी उनसे डरते है
वो लहू युवा ही होता है
जिसने गर्म लहू संचार किया
भारत माँ को अपना शीश चढ़ा
भारत माँ का था श्रन्गार किया
अशफाक़ आज़ाद हो सुखदेव भगत
हर ने अल्हड बेबाक अंदाज़ जिया
फांसी के फन्दे चूम उठे
भारत माँ पर सब कुछ वार दिया
क्युकी जो फिक्र राष्ट्र की करते है
वो नहीं किसी से डरते है
हंस कर सूली चढ़ते है
शत्रु भी उनसे डरते है
………………….
आपका अपना
रवि कुमार “रवि”

जहाँ कलम पड़ी रहती सत्ता के गलियारों में
जहाँ शब्द भी बिक जाते चंद सिक्को की झंकारों में
उस भारत की धरती पर अग्निशिखा जलने निकला हु
शब्दों के बुन मैं जाल यहाँ इतिहास बनाने निकला हु
नेता हो, अभिनेता हो यहाँ सब अपने मद जीते है
नही राष्ट्र की फिकर इन्हें ये लहू देस का पीते है
इन सत्ता के लत्खोरो को इनकी औकात बताने निकला हु
अपने शब्दों से आग लगा इनकी चिता जलने निकला हु
शब्दों के बुन मैं जाल यहाँ इतिहास बनाने निकला हु

…………………………………

रवि कुमार “रवि”

लिखने को तो मैं भी
रस, छंद अलंकार लिख दू
वासना में डूबा हुआ
मैं प्यार लिख दू
मुझमे भी है बाकि अभी
कुछ इश्क की बारीकिया
गर कहो तो शब्दों में मैं
अपनी दिल की हर बात लिख दू
पर तुम बताओ साथिओ
क्या मुल्क के ऐसे हालात है
के तज के खडग हाथो से अपने
प्रेमिका का अपने श्रृंगार कर दू
देती नहीं मुझे इजाज़त
मेरे मुल्क की वीरानिया
ऐसे में छोड़ कर वीर रस
कैसे मैं श्रृंगार और मनुहार लिख दू
………………..
रवि कुमार “रवि”

हम तेरी महफ़िल बस
एक कडवा सच बताने आये है
अस्तीनो में छुपे है जो सांप तेरे
वो विषधर दिखने आये है
रो रही माँ भारती
बिलख बिलख कर
तू जागता क्यों नहीं ऐ नौजवा
माँ भारती का जो है चीर हरते
वो दुशाशन तुझको दिखाने आये है
अब तेरी मर्ज़ी जो हो
वोही तू समझ ले ऐ नौजवान
चाहे बचा ले राष्ट्र अपना
चाहे भुला दे राष्ट्र हित को तू
तेरी बहती नसों में जो आग है
उसकी तपिश तुझको दिखाने आये है
अस्तीनो में छुपे है जो सांप तेरे
वो विषधर दिखने आये है
……………
रवि कुमार “रवि”

में सिपाही हूँ …..
किसी का बेटा, किसी का पति, तो किसी का भाई हूँ
रहता हु चौकस सीमा पर
वतन का प्रहरी बनकर
किसी का दोस्त, किसी का मामा, तो किसी का जमाई हूँ
रहता हु हर दम तैयार मौत से मिलने को
सहादत समझ कर अपनी
जमा हूँ हड्डियो को गलाती सर्द रातो में तो
जिस्म को झुलसाती धुप में भी
अपने वतन से मोह्हब्बत का लहरी बनकर
चंद टुकड़े ये कागज़ के जिन्हें तुम नोट कहते हो
मुझे जान देने को मजबूर नही करते
जान तो दे देता हु बस इस बात से हंस कर
के ये वतन जो मेरी बहन भी है
उसकी सुरक्षा में लगा में इकलौता उसका भाई हूँ
है किसकी हिम्मत जो टिक जाये सामने मेरे
मेरे हौसलों से डिगना होगा तुझे ऐ आसमा
तो समंदर तुझे भी देना होगा मुझे रास्ता
मैं कोई ख़ाक नही, कोई ज़र्रा नही
मैं महान हिंद का एक अदना सा सिपाही हूँ
—————————————
रवि कुमार “रवि”

युद्ध के बाद क्रंदन सुनने की आदत डाल लो
अपने ह्रदय को संगिनी पाषाण जैसे ढाल लो
राष्ट्र गौरव को बचाने युद्ध में हम जायेंगे
बदन पे लिपटेगा कफ़न अपने, तुम साडी सफ़ेद अब निकाल लो

मनुहार और श्रृंगार का समय अब है जा चूका
प्रियतम से होना है अब दूर तुमको इस बात को अब तुम मान लो
कर तिलक मस्तक पर मेरे, अपने लहू से होसला मेरा बढाओ तुम
और अपने हाथो से सिन्दूर अपनी मांग से उतार लो
———–
रवि कुमार “रवि”

ये युवाओ की पुकार है
या सिंह की दहाड़ है
केसी है ये गर्जना
जो चीरती पहाड़ है
गगन भी फट पड़ा है आज
हिल रही ज़मीन है
ये कौन है चिंघाड़ता
के पिघल रही जमीन है
जिधर भी देखू आज में
उठा कर अपनी आँख को
गूँज हर दिशा में है
ये नाद बहुत घनघोर है
लगता है आज उठ खड़ा
हुआ वतन का नौजवान है
तभी गगन है डोलता
और विद्रोह की अग्नि चहुँ ओर है
बदलेंगे इस वतन को ये
इस बात से में आश्वस्त हु
ये विद्रोह है युवाओ का
राष्ट्र प्रेम से सराबोर है
प्रभु मेरे चमन में तू
इतना युवा खून दे
लहू की न कमी पड़े
ये युद्ध का अंतिम छोर है
.. ये युद्ध का अंतिम छोर है
…………….
रवि कुमार “रवि”

India, Bharat, Bharat Vs India, Aryavrat

मैं भारत का रहने वाला हु
मोह नहीं तख्तो ताज का
में सौंधी मिटटी में पलने वाला हु
हूँ मैं राम कृष्ण भरत का वंशज
इस बात पर है अभिमान मुझे
अपने गौरवशाली इतिहास पर
मैं गर्व से इतराने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
ऋषि दधिची, विश्वामित्र हुए है
मेरी पावन धरती पर
अर्थशास्त्र और राजनीती पर
चाणक्य को रटने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
जिस अंग्रेजी इंडिया को मित्रो
आज गले लगाये हो
इसी इंडिया से कल गला घुटेगा
ये गीत सुनाने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
जागो शिवा महाराणा के वंशज
भारत को फिर एक बार जगाना है
अपने बहते लहू से
मैं भारत की नयी तस्वीर बनाने वाला हु
देश हित खातिर मैं भी
नयी अलख जगाने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
……………………………
रवि कुमार “रवि

ये चुप रहने का वक्त नहीं
भारत वीरो हुंकार भरो
मातृभूमि की रक्षा को
चक्र सुदर्शन संग गांडीव धरो
अब जन्मभूमि की रक्षा ही
अपना केवल एक लक्ष्य बने
हर सुख सुविधाओ को छोड़ युवा
स्वयं शिव, राणा का विकल्प बने
अब गंगा जल ले हाथो
बस इतना तुम संकल्प करो
भारत माता की रक्षा में
कर देंगे अपना सब कुछ बलिदान युवा
और देश धर्म की रक्षा कर
तुम भारत का काया कल्प करो
ये चुप रहने का वक्त नहीं
भारत वीरो हुंकार भरो
मातृभूमि की रक्षा को
चक्र सुदर्शन संग गांडीव धरो
………………
रवि “मुज़फ्फ़रनगरी ”