Posts Tagged ‘poems on karun ras’

जो रखती है कोख में
सहती है हर दुःख
पिलाती है दूध
सींचती है अपना
लहू पिला कर
वो माँ है
जो छुपाती है आँचल में
उतरती है नज़र,
दुलारती है प्यार से
सहती है हर गम
खुश होकर, न करती शिकवा
वो माँ है
एक माँ ही तो है
जो रखकर खुद फांका
डालती है निवाला
अपनी औलाद के मुह में
और कह देती है
आज भूख नहीं है
खाने का मन नहीं है
वो माँ है
सहती है कडवी बाते
औलाद की, बहु की भी
रोती है रात भर
भिगोती है आँचल
फिर भी सुबह
हस कर देती है दुआ
दिल से, बिना कोई
शिकवा किए
तो वो सिर्फ माँ है
बन जाती है ढाल
सह लेती है हर
दुःख, हर परेशानी
छीन लेती है
हर मुसीबत को
अपनी औलाद पर से
बन जाती है देवी,
झुक जाते है भगवान् भी
जिसके सामने हार कर
तो वो सिर्फ माँ है , माँ है
सिर्फ माँ है

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एक कवी की उसी के ही तरीके से
जवाब देने की एक छोटी सी कोशिश
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सुना था मैंने नहीं कभी कवी ने
सूरज को धुन्दला बतलाया
थामी जिसने कलम की ताकत
उसका नहीं ज़मीर बिक पाया
पर अब हर मोड़ और हर नुक्कड़ पर
धोखे बाज़ खड़े है
पहन देश भक्ति का चोला
काले गद्दार खड़े है
ऐसे ऐसे कवी हुए है
जिनकी कलम में स्याही नहीं, लहू भरा था
अपनी कलम के बल पर जिसने
क्रांति का अग्नि पथ लिखा था
तेरे देश में देख रवि अब
ऐसे झूठे लेखक कवी खड़े है
सत्ता हथियाने की ललक में जिनके
ज़मीर धरती पर मुर्दों की तरह गड़े है

howrah bridge of Kolkata

howrah bridge, Pride of Bengal, Bengali Culture

आओ तुम्हे बंगाल दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
हर हिन्दुस्तानी को गर्व दिया है
वन्देमातरम का तर्ज दिया है
१६ वर्ष में चढ़ा जो फांसी
खुदीराम नाम का अल्ल्हड़ युवा दिया है
८ वर्ष में जिसने बाघ था मारा
कुल्हाड़ी वाला बाघा जतिन दिया है
खून के बदले जो देता आजादी
बाबु सुभाष एक बंगाली नाम दिया है
हरे कृष्ण नाम की सब जपते माला
पहला जपने वाला चैतन्य महाप्रभु दिया है
जिंदगी की रस्ते जब कोई साथ नही दे
तब एकला चोलो का मंत्र दिया है
हिन्दुस्तानी भारत को मेरे
संस्कृतिक एक इतिहास दिया है
आओ तम्हे बंगाल दिखा दू
एक भारत की अद्भुत तस्वीर दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
……………….
रवि “मुज़फ्फरनगरी”
आमार बांग्ला – शोनार बांग्ला