Posts Tagged ‘patriotic’

12

prithviraj_chauhan_l (more…)

जो फिक्र राष्ट्र की करते है
वो नहीं किसी से डरते है
हंस कर सूली चढ़ते है
शत्रु भी उनसे डरते है
वो लहू युवा ही होता है
जिसने गर्म लहू संचार किया
भारत माँ को अपना शीश चढ़ा
भारत माँ का था श्रन्गार किया
अशफाक़ आज़ाद हो सुखदेव भगत
हर ने अल्हड बेबाक अंदाज़ जिया
फांसी के फन्दे चूम उठे
भारत माँ पर सब कुछ वार दिया
क्युकी जो फिक्र राष्ट्र की करते है
वो नहीं किसी से डरते है
हंस कर सूली चढ़ते है
शत्रु भी उनसे डरते है
………………….
आपका अपना
रवि कुमार “रवि”

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर एक छोटी सी रचना
…………………………………………
जय हो गणतंत्र
धन्य हो लोकतंत्र
खड्डे में जनता,
महंगाई से मरता
सिलेंडर में दबता
तेल में जलता
घुटता जनतंत्र
अद्भुत लोकतंत्र
जय हो गणतंत्र
छद्म पंथनिरपेक्षता ढोता
संस्कृति को रोता
आतंकवाद से मरता
अधिकारों को लड़ता
अनगिनत फूहड़ता
चूल्हे में जनतंत्र
जय ही गणतंत्र
उम्मीदों पर जीता
ज़ख्मो को सीता
बचपन को बचाता
सुनहरे ख्वाब देखता
कब आएगा गणतंत्र
जब धन्य होगा लोकतंत्र
और कहेंगे हम
जय हो गणतंत्र
जय हो लोकतंत्र
……………………………..
रवि कुमार “रवि”

आओ तुम्हे बंगाल दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
हर हिन्दुस्तानी को गर्व दिया है
वन्देमातरम का तर्ज दिया है
१६ वर्ष में चढ़ा जो फांसी
खुदीराम नाम का अल्ल्हड़ युवा दिया है
८ वर्ष में जिसने बाघ था मारा
कुल्हाड़ी वाला बाघा जतिन दिया है
खून के बदले जो देता आजादी
बाबु सुभाष एक बंगाली नाम दिया है
हरे कृष्ण नाम की सब जपते माला
पहला जपने वाला चैतन्य महाप्रभु दिया है
जिंदगी की रस्ते जब कोई साथ नही दे
तब एकला चोलो का मंत्र दिया है
हिन्दुस्तानी भारत को मेरे
संस्कृतिक एक इतिहास दिया है
आओ तम्हे बंगाल दिखा दू
एक भारत की अद्भुत तस्वीर दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
……………….
रवि कुमार “रवि”

घुट घुट कर मरते जनतंत्र संग
गणतंत्र तुम्हारा स्वागत है
भूखे नंगे बच्चो के संग
गणतंत्र तुम्हारा स्वागत है
50 वे दशक आये थे जब तुम
लोकतंत्र ही नारा था
गणतंत्र तुम्हारी ताकत थी
जनतंत्र को नया सहारा था
तिल तिल मरता भारत है
और बुझते दिनों की आह्ट है
मर मर के जीते जनतंत्र संग
गणतंत्र तुम्हारा स्वागत है
रोज़ ही मरते अब किसान और
युवा ह्रदय भी आहत है
तिल तिल जलते भारत के संग
गणतंत्र तुम्हारा स्वागत है
अफजल कसाब यहाँ है अतिथि
अन्ना स्वामी अपराधी है
जनतंत्र के होते बलात्कार संग
गणतंत्र तुम्हारा स्वागत है
……………..
रवि कुमार “रवि”

India, Bharat, Bharat Vs India, Aryavrat

मैं भारत का रहने वाला हु
मोह नहीं तख्तो ताज का
में सौंधी मिटटी में पलने वाला हु
हूँ मैं राम कृष्ण भरत का वंशज
इस बात पर है अभिमान मुझे
अपने गौरवशाली इतिहास पर
मैं गर्व से इतराने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
ऋषि दधिची, विश्वामित्र हुए है
मेरी पावन धरती पर
अर्थशास्त्र और राजनीती पर
चाणक्य को रटने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
जिस अंग्रेजी इंडिया को मित्रो
आज गले लगाये हो
इसी इंडिया से कल गला घुटेगा
ये गीत सुनाने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
जागो शिवा महाराणा के वंशज
भारत को फिर एक बार जगाना है
अपने बहते लहू से
मैं भारत की नयी तस्वीर बनाने वाला हु
देश हित खातिर मैं भी
नयी अलख जगाने वाला हु
इंडिया मेरी पहचान नहीं
मैं भारत का रहने वाला हु
……………………………
रवि कुमार “रवि

Bharat Mata, Mother India, My Mother Land

नव सृजन नव अलंकार चाहता हु
माँ भारती अब करना तेरा श्रृंगार चाहता हु
अस्थियो का मेरे बने अब तेरा आभूषण
और मेरे लहू से तेरा स्नान हो भले ही
पर तेरी आँचल में अब माँ
खुशिया अब देखना अपार चाहता हु
हूँगा में भाग्यशाली
खातिर तेरे में मर जो सकूंगा
पर देखना तेरे बदन पर अब माँ भारती
धानी चुनर और खुशिओ का अम्बार चाहता हु
………..
रवि कुमार “रवि”

हम तेरी महफ़िल बस
एक कडवा सच बताने आये है
अस्तीनो में छुपे है जो सांप तेरे
वो विषधर दिखाने आये है
रो रही माँ भारती
बिलख बिलख कर
तू जागता क्यों नहीं ऐ नौजवा
माँ भारती का जो है चीर हरते
वो दुशाशन तुझको दिखाने आये है
अब तेरी मर्ज़ी जो हो
वोही तू समझ ले ऐ नौजवान
चाहे बचा ले राष्ट्र अपना
चाहे भुला दे राष्ट्र हित को तू
तेरी बहती नसों में जो आग है
उसकी तपिश तुझको दिखाने आये है
अस्तीनो में छुपे है जो सांप तेरे
वो विषधर दिखने आये है
……………
रवि कुमार “मुज़फ्फ़रनगरी”