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Bharat Mata, Mother India, My Mother Land

Bharat Mata, Mother India, My Mother Land

पुण्य भूमि है धरती अपनी
भारत माता के गीत सब गाओ रे
चन्दन है इस देश की माटी
इसका तिलक लगाओ रे ……………….
हर कन्या इस देश की सीता,
हर बालक कृष्ण सलोना
धरती अपनी अन्न जल देती
महकता हर आँगन हर कोना
सब मिल करे है भारत माँ का वंदन
उच्च स्वर में सब गुनगुनाओ रे
चन्दन है इस देश की माटी
इसका तिलक लगाओ रे ……………….
धरती सुनहरी अम्बर नीला
यहाँ बहती गंगा यमुना सरस सलिला
खुशिया है बाँटता हर शहर हर गाँव रे
चन्दन है इस देश की माटी
इसका तिलक लगाओ रे ……………….
बहुत कुछ पाया इस देश से हमने
जीवन की हर खुशिया और हर रंग
दिया देश ने हमको क्या जवानी क्या बचपन की छाओ रे
चन्दन है इस देश की माटी
इसका तिलक लगाओ रे ……………….

रवि कुमार “रवि”

जाग युवा अब समर शेष है उसका इतिहास लिखा अब जायेगा
फूल सुमन शय्या को तज जो अब कंटक पथ अपनाएगा
स्वर्नाकित होगी अब काया उस दीवाने मतवाले की
राष्ट्रहित की बलिवेदी पर जो अपना शीश चढ़ाएगा
तन मन धन कर सब कुछ अर्पण देश धर्म की रक्षा में
जो जीता तो सुख पायेगा जो मरा, तो शहीद कहाया जायेगा
जाग युवा अब समर शेष है उसका इतिहास लिखा अब जायेगा
फूल सुमन शय्या को तज जो अब कंटक पथ अपनाएगा
…………….
रवि कुमार “रवि”

आओ तुम्हे बंगाल दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
हर हिन्दुस्तानी को गर्व दिया है
वन्देमातरम का तर्ज दिया है
१६ वर्ष में चढ़ा जो फांसी
खुदीराम नाम का अल्ल्हड़ युवा दिया है
८ वर्ष में जिसने बाघ था मारा
कुल्हाड़ी वाला बाघा जतिन दिया है
खून के बदले जो देता आजादी
बाबु सुभाष एक बंगाली नाम दिया है
हरे कृष्ण नाम की सब जपते माला
पहला जपने वाला चैतन्य महाप्रभु दिया है
जिंदगी की रस्ते जब कोई साथ नही दे
तब एकला चोलो का मंत्र दिया है
हिन्दुस्तानी भारत को मेरे
संस्कृतिक एक इतिहास दिया है
आओ तम्हे बंगाल दिखा दू
एक भारत की अद्भुत तस्वीर दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
……………….
रवि कुमार “रवि”

पुरखो ने अपने युद्ध लड़ा है
हम भी कुछ कर दिखलायेंगे
वतन पर उठने वाले हाथो को
जड़ से फाड़ दिखायेंगे
अहिंसक है पर कमज़ोर नही है
खून में अपने वोही रवानी है
लहू में अपनी कितनी गर्मी है
फिरंगियों को याद कहानी है
संभल जाओ दुसमन वतन के
लौटा वही ज़माना है
गोली का बदला गोली से ले जो
ये इतिहास अपना खूब पुराना है
अपने दम से वक्त बदलेंगे
दुनिया को सच्चाई दिखलायेंगे
वतन पर उठने वाले हाथो को
जड़ से फाड़ दिखायेंगे
———–
रवि कुमार भद्र

हूँ में छोटा, नादान
और नहीं है अनुभव मुझे,
कुछ ख़ास लिखने का,
ना ही है सलीका भी
मुझे अपनी बात
प्रभावपूर्ण ढंग से कहने का
यहाँ तो है बहुत लोग
जो है विद्वान
और शब्दों के धनि भी है
पर फिर भी मुझ
नौसिखिये को नहीं है सहारा
कुछ सीखने का न
उन् जैसे शब्दों के धनि
विद्वान बनने का
तो सोचता हु
क्यों न छोड़ दू खुद को
इश्वर और
खुद के भरोसे
शायद यही तिरस्कार
मुझे सिखला दे कुछ जादूगरी
जीतने की दुनिया को,
और खुद को साबित कर एक दिन
शब्दों का जादूगर बन
दुनिए को दिखलाने की
………….
रवि कुमार “रवि”

जब सत्य निष्प्राण हो
विधर्मी का कल्याण हो
सत्य हो डरा हुआ
और असत्य को प्रणाम हो
वीर तुम झुको नहीं
युद्ध से डरो नहीं
जब शौर्य हो झुका हुआ
घुटनों पर टिका हुआ
दम तोड़ता हो न्याय जब
बैसाखियो पर खड़ा हुआ
वीर तुम झुको नहीं
युद्ध से से डरो नहीं
जब साथ में न मित्र हो
उनका व्यवहार भी विचित्र हो
चित्कारती धरा दिखे
और मान देश का खंड खंड हो
वीर तुम झुको नहीं
युद्ध से डरो नहीं
गगन तक न चिंघाड़ हो
और शत्रु को न ललकार हो
शीश काट आतताई का
और न माँ भारती की जयकार हो
तब तक वीर तुम रुको नहो
वीर तुम झुको नहीं
बहे क्यों न शोणित की नदी
पर युद्ध से डरो नहीं
युद्ध से डरो नहीं
……………
रवि कुमार “रवि”

howrah bridge of Kolkata

howrah bridge, Pride of Bengal, Bengali Culture

आओ तुम्हे बंगाल दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
हर हिन्दुस्तानी को गर्व दिया है
वन्देमातरम का तर्ज दिया है
१६ वर्ष में चढ़ा जो फांसी
खुदीराम नाम का अल्ल्हड़ युवा दिया है
८ वर्ष में जिसने बाघ था मारा
कुल्हाड़ी वाला बाघा जतिन दिया है
खून के बदले जो देता आजादी
बाबु सुभाष एक बंगाली नाम दिया है
हरे कृष्ण नाम की सब जपते माला
पहला जपने वाला चैतन्य महाप्रभु दिया है
जिंदगी की रस्ते जब कोई साथ नही दे
तब एकला चोलो का मंत्र दिया है
हिन्दुस्तानी भारत को मेरे
संस्कृतिक एक इतिहास दिया है
आओ तम्हे बंगाल दिखा दू
एक भारत की अद्भुत तस्वीर दिखा दू
भारत की संस्कृतिक प्राचीर दिखा दू
शांति – क्रांति का अद्भुत मिश्रण
ऐसी बंगाली तासीर दिखा दू
……………….
रवि “मुज़फ्फरनगरी”
आमार बांग्ला – शोनार बांग्ला