भारत विश्व कि 2000 से ज्यादा वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति थी

Posted: April 9, 2015 in Veer Ras
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उक्त पोस्ट श्री संदीप देव जी के फेसबुक वाल से साभार
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भारत विश्व कि 2000 से ज्यादा वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति थी ‪#‎TheTruIndianHistory‬

Tribhuwan Singh. भारत एक कृषिप्रधान देश था/ हैं, ये हमको मार्कसवादी चिन्तकों ने पढाया / इस झूठ के ढोल मे कितना बडा पोल है ?? हमें पढाया गया कि भारत एक अध्यात्मिक और कृषि प्रधान देश था लेकिन ये नहीं बताया कि भारत विश्व कि 2000 से ज्यादा वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति थी /
angus Maddison और paul Bairoch अमिय कुमार बागची और Will Durant जैसे आर्थिक और सामाजिक इतिहास करों ने भारत की जॉ तस्वीर पेश की , वो चौकाने वाली है / Will Durant ने 1930 मे एक पुस्तक लिखी Case For India। ये इलहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफ लाल बहादुर वर्मा के अनुसार दुनिया के आ तक सबसे ज्यादा पढे जाने वाले writer हैं और निर्विवाद हैं / इनको अभी तक किसी ism में फित नहीं किया गया है / उन्हीन की पुस्तक के कुछ अंश कि भारत को क्यों उद्योगों को बढ़वा देना चाहिये अपना स्वर्णिम आर्थिक युग वापसी के लिये ?? और उसका खुद का मॉडेल होना चाहिये न कि अमेरिका या यूरोप कि नकल करनी चाहिये /
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” जो लोग आज हिंदुओं की अवर्णनीय गरीबी और असहायता आज देख रहे हैं , उन्हें ये विस्वास ही न होगा ये भारत की धन वैभव और संपत्ति ही थी जिसने इंग्लैंड और फ्रांस के डकैतों (Pirates) को अपनी तरफ आकर्षित किया था। इस ” धन सम्पत्ति” के बारे में Sunderland लिखता है :—
” ये धन वैभव और सम्पत्ति हिंदुओं ने विभिन्न तरह की विशाल (vast) इंडस्ट्री के द्वारा बनाया था। किसी भी सभ्य समाज को जितनी भी तरह की मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट के बारे में पता होंगे ,- मनुष्य के मस्तिष्क और हाथ से बनने वाली हर रचना (creation) , जो कहीं भी exist करती होगी , जिसकी बहुमूल्यता या तो उसकी उपयोगिता के कारण होगी या फिर सुंदरता के कारण, – उन सब का उत्पादन भारत में प्राचीन कल से हो रहा है ।
भारत यूरोप या एशिया के किसी भी देश से बड़ा इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग देश रहा है।इसके टेक्सटाइल के उत्पाद — लूम से बनने वाले महीन (fine) उत्पाद , कॉटन , ऊन लिनेन और सिल्क बहुत लोकप्रिय थे। इसी के साथ exquisite जवेल्लरी और सुन्दर आकारों में तराशे गए महंगे स्टोन्स , या फिर इसकी pottery , पोर्सलेन्स , हर तरह के उत्तम रंगीन और मनमोहक आकार के ceramics ; या फिर मेटल के महीन काम – आयरन स्टील सिल्वर और गोल्ड हों।इस देश के पास महान आर्किटेक्चर था जो सुंदरता में किसी भी देश की तुलना में उत्तम था ।इसके पास इंजीनियरिंग का महान काम था। इसके पास महान व्यापारी और बिजनेसमैन थे । बड़े बड़े बैंकर और फिनांसर थे। ये सिर्फ महानतम शिप बनाने वाला राष्ट्र मात्र नहीं था बल्कि दुनिया में सभ्य समझे जाने वाले सारे राष्ट्रों से व्यवसाय और व्यापार करता था । ऐसा भारत देश मिला था ब्रिटिशर्स को जब उन्होंने भारत की धरती पर कदम रखा था ।”
पेज- 8-9
ये वही धन संपत्ती थी जिसको कब्जाने का ईस्ट इंडिया कंपनी का इरादा था / पहले ही 1686 में कंपनी के डाइरेक्टर्स ने अपने इरादे को जाहिर कर दिया था –” आने वाले समय में भारत में विशाल और सुदृढ़ अंग्रेजी राज्य का आधिपत्य जमाना ” / कोम्पंय ने हिन्दू शाशकों से आग्रह करके मद्रास कॅल्कटा और बम्बई में व्यवसाय के केन्द्रा स्थापित किये , लेकिन उनकी अनुमति के बिना ही , उन केन्द्रों मे ( जिनको वो फॅक्टरी कहते थे ) उन केन्द्रों को गोला बारूद और सैनकों सेसुदृढ़ किया /
1756 में बंगाल के राजा ने इस अनाधिकृत अतिक्रमण के विरुद्ध इंग्लीश फ़ोर्ट विलियम पर आक्रमण किया और 146 अंग्रेज़ों को कॅल्कटा के “black Hole” मे बंदी बना दिया, जिसमे से अगली सुबह मात्र २३ लोग जिंदा बाहर् आये / इसी के एक साल बाद रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल की सेना को पराजित किया जिसमें मात्र २२ ब्रिटिशर मारे गये और कंपनी को भारत के सबसे धनी प्रांत का मालिक घोषित कर दिया गया / उसने बाकी क्षेत्रों पर धोखाधड़ी से ,पूर्व मे किये समझौतों का उल्लंघन करके , एक राजा को दूसरे के खिलाफ लड़ाकर , घूस लेकर या देकर , कब्जा किया / एक ही बार में ४० लाख दॉलार कॅल्कटा भेजा गया / उसने हिन्दू शासकों को सैनिक सहायता और गोला बारूद मुहैया करने के एवज में 1170000 (११ लाख 70 हजार ) डॉलर उफार स्वरूप लिये और उसको अपने पॉकेट के हवाले किया / इसके साथ साथ 140,000 डॉलर सालाना रकम अलग से लेता था / (इस आरोप के खिलाफ) ब्रिटिश पार्लियामेंट ने उसकी जांच की , मुकदमा चलाया , परंतु बरी कर दिया / लेकिन उसने आत्महत्या कर ली / उसने (क्लाइव ने ) कहा कि -” जब भी मैं उस देश की विलक्षण सम्पन्नता के बारे मे सोचता हूँ , और तात्कालिक समय में उसके एक च्चोते हिस्से को मैं खुद हथिया लेता हों तो मुझे अपने moderation पर आस्चार्य होता है ” / इस तरह का तो नैतिक आदर्श था उन लोगों का , जो भारत में सभ्यता लाने की बात करते थे /पेज – 9
From : The Case For India by Will Durant , 1930 ( अंग्रेज़ों द्वरा प्रतिबंधित )

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