युद्ध के बाद क्रंदन सुनने की आदत डाल …

Posted: November 19, 2012 in Veer Ras
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युद्ध के बाद क्रंदन सुनने की आदत डाल लो
अपने ह्रदय को संगिनी पाषाण जैसे ढाल लो
राष्ट्र गौरव को बचाने युद्ध में हम जायेंगे
बदन पे लिपटेगा कफ़न अपने, तुम साडी सफ़ेद अब निकाल लो

मनुहार और श्रृंगार का समय अब है जा चूका
प्रियतम से होना है अब दूर तुमको इस बात को अब तुम मान लो
कर तिलक मस्तक पर मेरे, अपने लहू से होसला मेरा बढाओ तुम
और अपने हाथो से सिन्दूर अपनी मांग से उतार लो
———–
रवि कुमार “रवि”

Comments
  1. HRITESH says:

    VERY GOOD POEM I LIKE IT

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