प्रेम की भाषा को अब प्रियतम तुम अंगारे बन जाने दो

Posted: November 10, 2012 in Veer Ras
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प्रेम की भाषा को अब प्रियतम
तुम अंगारे बन जाने दो
बहुत गुनगुना लिया प्यार के स्वर को
अब कुछ गीत देशप्रेम के गाने दो
बनी रही तुम मेरे प्रेम की शक्ति
पर अब मेरी हिम्मत बन जाओ तुम
दो बलिदान सिन्दूर का अपने
और कुछ शब्दों की तलवारे ठन जाने दो
प्रेम की भाषा को अब प्रियतम
तुम अंगारे बन जाने दो
बहुत गुनगुना लिया प्यार के स्वर को
अब कुछ गीत देशप्रेम के गाने दो
बनो तुम पन्ना, जीजा सम माता
अपने पति-पुत्रो का भी बलिदान करो
राष्ट्रहित की बलिवेदी पर प्रियतम
अपने परिवार हित को भी चढ़ जाने दो
त्याग श्रेष्ट है जीवन में अपने
इस बात का तुम अब ध्यान धरो
मुझे तिलक करो रक्त से अपने
कुछ और शीश वतन पर चढ़ जाने दो
प्रेम की भाषा को अब प्रियतम
तुम अंगारे बन जाने दो
बहुत गुनगुना लिया प्यार के स्वर को
अब कुछ गीत देशप्रेम के गाने दो

……………

रवि कुमार “रवि”

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