टूट रहा है धर्म सनातन छूट रहे संस्कृति के तार

Posted: July 13, 2012 in Vyang

टूट रहा है धर्म सनातन
छूट रहे संस्कृति के तार
छूट गया है कर्म हमारा
हिन्दू तेरा न अब होगा उद्धार

गिट पिट, गिट पिट करते अंग्रेजी
हिंदी का है अब मोल कहा
सूट पहन कर अब है इतराते
धोती कुरते नहीं अब चलन यहाँ
…………
माथे नहीं है सजती बिंदिया
ना मांग में भरती अब सिन्दूर
हिन्दुस्तानी नारी कहा बची है
नारी हुई धरम करम से दूर
………………….
चरण ऱज अब नहीं लगता माथे पर
माँ बाप भी देते अब आशीष नहीं
हेल्लो हाय कहने वाली जेनरेशन
चरण वंदन में करते अब यकीन नहीं
……………….
भारत माँ तेरा भाग्य है फूटा
अब इस बड़ा दुर्भाग्य कहा
तेरे बच्चे तुझे अब माँ नहीं कहते
होता नहीं रक्त से तेरा अब श्रृंगार यहाँ
…………….
रवि “मुज़फ्फ़रनगरी”

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